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Kushinagar temple की हिंदी में पूरी जानकारियां

 कुशीनगर में गौतम बुद्ध की अनेक सारी मंदिरो का शिलान्यास किया गया है। जिसमे से कुछ मंदिर को संपूर्णता पूर्वक बनाया जा चुका है, तथा कुछ मंदिरो का शिलान्यास करना बाकी है। कुशीनगर में गौतम बुद्ध के बलयास्था से अंत तक का संग्रहण मिलता है। आज हम इन्हीं कुछ मंदिरो के बारे में जानेंगे। 

गौतम बुद्ध के मैत्री परियोजना(Gautam Buddha's Friendship Project):

Kushinagarjankari.in


कुशीनगर में संसार का सबसे बड़ा विशाल प्रतिमा ' मैत्रेय - बुद्ध ' का निर्माण किया जा रहा है। मैत्रेय परियोजना के तहत इस मंदिर निर्माण का काम तेजी से किया जा रहा है। इस परियोजना को बनाने के लिए सभी बौद्धिक राष्ट्रों का सहयोग प्राप्त हुआ है। माना जा रहा है, कि इस मूर्ति की लंबाई 500 फिट रखी जाएगी, जिस मंच पर गौतम बुद्ध विद्यमान होने उसके अंदर लगभग 4000 लोगो को बैठ कर ध्यान करने की व्यवस्था की जाने वाली है। इस प्रतिमा की शैली तथा भेष - भूषा सब कुछ तिब्बती के अनुसार किया का रहा है। बुद्ध की प्रतिमा ऐसे रखी जा रहे है जैसे बुद्ध सिंघासन पर विराजमान ऐसे होंगे जैसे कि यह उठ कर चलने ही वाले हो। माना जाता है कि, मैत्री बुद्ध सुखावती इस आसन में विराजमान है। और बुद्ध सुखवाती किसी भी पल पृथ्वी की चाल पड़ेंगे। ठीक इसी के अनुसार गौतम बुद्ध की भी प्रतिमा का शिलान्यास हो रहा है। 

गौतम बुद्ध के कुछ प्रमुख स्पुत तथा मंदिर(Some of the major sputas and temples of Gautama Buddh)

निर्वाण स्पूत(Nirvana Spoot):

Kushinagarjankari.in/ Nirman spoot

गौतम बुद्ध के महापरिनिर्वाण मंदिर से पूर्व की दिशा में इसका जिक्र मिलता है। माना जाता है कि इस निर्माण स्पूत को 1876 में खुदाई के दौरान खोजा गया । जो कि यह इट और रोड़ी से बने एक विशाल पर्वत की तरह है। इसके साथ ही इसी स्थान पे खुदाई के दौरान तांबे की नाव को भी प्राप्त किया गया। माना जाता है कि इसी नाव मे महात्मा बुद्ध की चिता की राख रखी गई थी। इसके चारों तरफ एक सुंदर पार्क की तरह सजाया गया है। जिसे देखने के लिए लाखो बौद्ध श्रद्धालुओं की भीड़ लगती है।

महापरिनिर्वाण स्थली(Mahaparinirvan Sthal):

Kushinagarjankari.in/ Parinirman sthali


कुशीनगर में गौतम बुद्ध का सबसे अनोखा मंदिर इसी को कहा जाता है जहां गौतम बुद्ध की 6.10 मीटर लेटी हुई लंबी प्रतिमा विराजमान है। कहा जाता है कि यह भी प्रतिमा  1876 में भी प्राप्त हुई। जिसे निर्माण स्थली के रूप में जानते है। जो भी यात्री कुशीनगर की पावन भूमि पे आता है  वह बिना इस मंदिर का दर्शन किए नहीं जाता है। क्यों कि इस मंदिर को सुंदर, चुनार के बलुआ पत्थर को काट कर बनाई गई है। क्यों कि महात्मा बुद्ध का यही पे महा निर्माण हुआ था। इसी मंदिर के खुदाई की दौरान प्रतिमा प्राप्त हुई थी। जो कि इसका संबंध पांचवीं शताब्दी से है। 

मथाकुवर मंदिर(Mathakuwar temple):

Kushinagarjankari.in/ Mathakuwar temple

कुशीनगर के महात्मा बुद्ध के अनेक मंदिर है। जिसमे से मथाकुवर मंदिर प्रमुख माना जाता है जो कि निर्माण मंदिर से लगभग 400 गज की दूरी पर है। क्यों कि खुदाई के दौरान महात्मा बुद्ध की प्रतिमा भूमि को छूते हुए प्राप्त की गई है। जिसकी प्रतिमा बोधिवृक्ष के नीचे मिली है। खुदाई अभिलेख से पता चलता है कि ये प्रतिमा 10 वीं या 11 वीं शताब्दी का है। इसके साथ ही इस प्रतिमा को बुद्ध मठ के नाम से भी जाना जाता है।

रामभार स्पूत(Rambhaar spoot):


रामभार स्पूत एक ऐसा स्पूत है जहां महात्मा बुद्ध को दफनाया गया था। जो कि निर्माण मंदिर से लगभग 1.5 मीटर की दूरी पर है। जिसकी ऊंचाई 15 मीटर के करीब है।  महात्मा बुद्ध 483 ईसा पूर्व इनके शरीर को यही पे मुखाग्नि दी गई थी। जिसके पश्चात इस स्पूत निर्माण हुआ। माना जाता है कि प्राचीन बौद्ध ग्रंथों में 'मुकुट बंधन चैत्य ' के नाम से जाना जाता है। कुछ शताब्दी पूर्व कुशीनगर पर शासक कर रहे मल्लाओ ने इस स्पूत को बनवाया था। 

आधुनिक स्पूत(Modarn spoot):

कुशीनगर में अनेक बौद्धिक देशों में मंदिरो तथा मठो का निर्माण करवाया है। जिसके पश्चात चीन द्वारा बनवाए गए महात्मा बुद्ध के सुन्दर मंदिर भी इसी आधुनिक स्पूत में आता है। जिसमे अनेक हाथो द्वारा बनाई गई महात्मा बुद्ध की सुंदर प्रतिमा है। इसके अलावा जापान द्वारा भी बनवाई गई महात्मा बुद्ध की प्रतिमा देखने को मिलती है। जिसमे महात्मा बुद्ध की प्रतिमा आठ धातुओं से मिलकर बनाई गई है। जो कि इस प्रतिमा को स्वंग जापान ने बनवाकर यहां विष्ठापिट किया है।

जापानी मंदिर(Japani temple):

महापरिनिर्वाण मंदिर के उत्तर दिशा ने जापानी मंदिर दिखाई पड़ता है। जापानी मंदिर अपनी विशिष्ट वस्तुओं के लिए माने जाते है। अगर हम इस मंदिर की बात करें तो इस मंदिर में भी जापान कि विशिष्ट वास्तु कालाओ से मिलकर बनाया गया है। यह मंदिर अर्धगोलाकर है जिसने गौतम बुद्ध की अष्ट धातु की मूर्ति विस्थापित की गई है। इस मंदिर के दर्शन करने के लिए सुबह 10 से 4 बजे तक खोला जाता है। इस मंदिर के चार द्वार है जो सभी दिशाओं में खुले रहते हैं। इस मंदिर की पूरी देख - रेख जापान कि संस्था करती है।

चीनी मंदिर(China temple):


कुशीनगर जो बुद्ध की नगरी कहा जाता है यहां तो गौतम बुद्ध की बहुत सारी मंदिरो का वर्णन मिलता है। जिसमे एक चीनी मंदिर की अलोकिक्ता देखने को मिलती है। इस मंदिर में गौतम बुद्ध की पूरी मूर्ति चीनी लगती है। और इसके दीवारों पे जातक कथाओं की पेंटिग देखने को मिलती है। जो मंदिर को अकर्षस्ता को बढ़ाता है। 

बौद्ध संग्रहालय(Buddhist Museum):

कुशीनगर में जितनी भी अनलोल वस्तुएं प्राप्त हुई वह सब इसी बौद्ध संग्रहालय में विस्थापित की हुई है। यह संग्रहालय सोमवार के अलावा 10 बजे से 5 बजे तक ही खुला रहता है। जो कि इंडो - जापान - श्रीलंकन बौद्ध केंद्रो के निकट स्थित है। इसके आस - पास जितनी नहीं महात्मा बुद्ध की मूर्तियां खुदाई के दौरान प्राप्त की गई इन सभी मूर्तियों को इस संग्रहालय में देखा जा सकता है। इसके अलावा यहां अनेक मंदिर जैसे, शिव मंदिर, राम जानकी मंदिर, बर्मी मंदिर, मेडिटेशन पार्क आदि मंदिर मौजूद है। 

कुशीनगर की कुछ प्रमुख नगर तथा प्रमुख साधन(Some of the major cities and major resources of Kushinagar):

कुशीनगर जिला जो की विकाश के रूप में हर साल बदलता  जा रहा है। कुशीनगर का पडरौना जिला मुख्यालय है। जहां पुराने राज दरबार है। जो कि यहां की पर्यटकों को सोभा बढ़ता है। जो कि कुशीनगर जिला में सबसे गाव जंगल खिरकिया के रूप में जाना जाता है। जहां अनेक देवी देवतायो का जिक्र मिलता है इसके साथ ही रामकोला मंदिर, खनवर मंदिर व कुबेर स्थान मंदिर जो कि इस जिला की प्रमुख मंदिरों में से एक है। जहां श्रद्धालुओं की बड़ी भीड़ लगती है। 

       इसके साथ ही कुशीनगर जिला शिक्षा का स्तर भी काफी तेजी से बदल रहा है। जहां बहुत सारे कॉलेज संस्थाएं मौजूद है। जिनमे बुद्ध डिग्री कॉलेज, उदित नारायण इंटर कॉलेज, किसान इंटर कॉलेज प्रमुख है। कुशीनगर में साधनों कि बात को जाए तो पडरौना, रामकोला, कटकुइया, खड्डा, दुदही, तमकुही रोड, पनिहवा रेलवे स्टेशन बनाए गए है। वर्तमान में यह गोरखपुर मंडल के अंतर्गत आता है। इसके साथ ही कुशीनगर जिले में अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे का भी काम पूरा होने वाला है।


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