Advertisement

कुशीनगर क्या है(what is kushinagar)

कुशीनगर क्यों प्रसिद्ध है(Why Kushinagar is famous):

Kushinagarjankari.in

कुशीनगर उत्तर - प्रदेश का ऐसा जिला है जहां महात्मा बुद्ध की मृत्यु और उनका अंतिम संस्कार हुआ था। बौद्ध धर्म मे मृत्यु अथवा शरीर छोड़ने की प्रक्रिया को "परी निर्माण " कहते है इसलिए उत्तर - प्रदेश का यह जिला बुद्ध तीर्थ यात्रियों के लिए प्रसिद्ध है। कुशीनगर जिला सुंदर नगर तथा  बौद्ध मंदिरों और सपूत के लिए जाना जाता है। कुशीनगर में एक माह का मेले का भी आयोजन किया जाता है। जो बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर रखा जाता है।

कुशीनगर के बारे में कुछ जानकारियां ( Some information about Kushinagar):

भारत के एक ऐसा राज्य जहां सबसे ज्यादा देवी - देवताओं के प्रमुख स्थल के रूप में जाना जाता है जिसे हम उस राज्य को उत्तर - प्रदेश के नाम से जानते है। कुशीनगर एक ऐसा प्रमुख स्थल है जहां भगवान बुद्ध की अलग - अलग स्मृतियां मौजूद है। जहां पर गौतम बुद्ध का महापरिनिर्वाण स्थल मौजूद है। वर्तमान में यह कुशीनगर जिले के रूप में जाना जाता है।

कुशीनगर जिला जो अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन का स्थल भी माना जाता है। क्यों कि यहां गौतम बुद्ध के विभिन्न मूर्तियां स्थापित कि गई है। जिसे देखने के लिए बौद्ध धर्मो के लोग हर साल आते रहते है। जिसे देखते हुए कुशीनगर जिले को अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के साथ जोड़ दिया गया हैं। आने वाले कुछ सालो में कुशीनगर अंतर्राष्ट्रीय रोजगार का भी केंद्र बन सकता है। कुशीनगर की शिक्षित संस्थाएं जैसे बुद्ध स्नाकोत्तर महाविद्यालय, बुद्ध इंटरमीडिएट कालेज महर्षि अरविंद विद्या मंदिर, किसान इंटर कॉलेज आदि शांस्थाए मौजूद है। जिसे कुशीनगर जिले के आने वाली पीढ़ी को उच्च शिछा की ओर अग्रसर करेंगे। कुशीनगर जिला सामान्यतः कृषि - प्रधान है। जिसकी सामान्यतः भाषा भोजपुरी, हिंदी है। कुशीनगर जिले में पैद्वार फसलों की बात करे तो गेहूं, गन्ना और धन उगाया जाता है।

कुशीनगर जिला भारतीय उत्तर - प्रदेश के गोरखपुर मंडल के अंतर्गत आता है। कुछ वर्षो पूर्व कुशीनगर देवरिया जिले के अंदर आता था। 13 मई 1994 को इसे पूरे तरह जनसंख्या के हिसाब से अलग कर एक नए जिले में परिवर्तित कर दिया गया। अब उत्तर - प्रदेश कुल 75 जिले कर दिए गए है। कुशीनगर लगभग गोरखपुर से 45km पूर्व में स्थित है जो राष्ट्रीय मार्ग NH 28 पर स्थित है। कुशीनगर से 20km पूर्व जाने पर बिहार राज्य आरंभ हो जाता है इसके दक्षिण - पश्चिम में देवरिया जिला, पश्चिम में गोरखपुर जिला तथा उत्तर - पश्चिम में महाराजगंज जिला आता है।

कुशीनगर लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र है जिसकी साक्षरता दर 76.66 प्रतिशत है। कुशीनगर में कुल सात विधानसभा क्षेत्र  फाजिलनगर, खड्डा, रामकोला, हाटा, कसया, पडरौना और तमकुही राज है। तथा जिले में छः तहसील पडरौना, कुशीनगर, हाटा, खड्डा, तमकुही राज, तथा कप्तानगंज है। कुशीनगर जिले में कुल ब्लॉक की संख्या 14 है पडरौना, विशुनपुरा, हाटा, कुशीनगर, दुदही, मोतिचक, सेवरही, नेबुअनौरंगिया, रामकोला, सुकरौली, फाजिलनगर, कप्तानगंज, रामकोला और तमकुही राज है। कुशीनगर के सभी विकासखण्ड (ब्लॉक) में कुल 1620 गांव है जिसकी  जनसंख्या लगभग 35,60,900 के करीब है।

(कुशीनगर जिले के जिलाधिकारी " एस. राजलिंगम" को हाल ही में नियुक्त किया गया है। जो आईएएस की भूमिका में है। तथा उपर जिला मजिस्ट्रेट "विंध्यावाशनी राय" जो पीसीएस का कर्यभाल संभाल रहे है।)

कुशीनगर के सार्वजनिक उपयोगिताएं(Public Utilities of Kushinagar):

• क्षेत्र: 2906,00 sq.km
• आबादी: 35,60,900
• पुरुष: 18,18,960
• महिला: 17,43,432
• भाषा: हिंदी, भोजपुरी
• गांव: 1620
• जिला अस्पताल: 1
• कालेज/विश्वविधालय: 2
• सरकारी संगठन: 6
• डाक: 2
• नगर पालिका: 1
• बिजली सुविधा: 1
• बैंक: 6

गौतम बुद्ध के चार मुख्य स्थल(Four main sites of Gautama Buddha):

1: लुंबनी
2: बोधगया
3: सारनाथ
4: कुशीनगर

कुशीनगर की धार्मिक और एतिहासिक परिचय(Religious and historical introduction of Kushinagar):

Kushinagarjankari.in


कुशीनगर का इतिहास काफी गौरव शाली है इसी स्थान पे गौतम बुद्ध महापरिनिर्वाण स्थल मौजूद है। प्राचीन काल में यह 16 महापदो में से एक मल्ल वंस की राजधानी थी। माना जाता है कि महर्षि बाल्मीकि के अनुसार यह स्थान त्रेता युग में भी था। जहां मर्यादा पुर्सुताम भगवान राम के बेटे कुश कि राजधानी थी। वह समय यह नगर कुशावती के नाम से जाना जाता था। मल्ल राजाओं के बौद्ध काल में महा जनपदों की राजधानी कुशिनारा के नाम से प्रसिद्ध हुई। ईशा पूर्व पचवी शताब्दी या छठी शताब्दी के सुरूआत में गौतम बुद्ध का आगमन इस पावन भूमि पे पड़ा। गौतम बुद्ध अपना अंतिम उपदेश देना के बाद महापरिनिर्वाण(मृत्यु) को प्राप्त हुए।

कहां जाता है, की जनरल ए कलिंघन और ए.सी.एल कोलाही की खुदाई के पश्चात छठी शताब्दी में बनी गौतम बुद्ध की लेटी हुई प्रतिमा प्राप्त हुई। इसके तुरंत बाद मथकुवार मंदिर तथा रामभर सपूत मंदिर भी खोजें गए। 1904 से 1912 के बीच इस स्थान को सुनिश्चित करने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने खुदाई करवाई। तभी से गौतम बुद्ध के प्राचीन मंदिरों को देखा गया। जिसके पश्चात इस स्थान को कुशीनगर के रूप में जाना गया।
     कुशीनगर से लगभग 20 km पूर्व जाने पर फाजिलनगर कस्बा पड़ता है। वहां किसी ' छतियाव ' नमक गांव में किसी ने गौतम बुद्ध को सूअर का कच्चा मांस खिला दिया था। जिसके कारण उन्हें दस्त की बीमारी शुरू हुई और  मल्लो की राजधानी कुशीनगर में आते - आते वह मृत्यु को प्राप्त हुए। कुशीनगर जो कि बौद्ध धर्मो के प्रतीक के रूप में जाना जाता है। जहां बौद्ध धर्मो के लोग हर वर्ष आते रहते है। यहां गौतम बुद्ध के बहुत सारी प्रतिमाओं का वर्णन मिलता है।

कुशीनगर के अन्य स्थलों का गौतम बुद्ध से संबंध(Relation of other places of Kushinagar to Gautam Buddha):

यहां बौद्ध धर्मो के समांतर जैन धर्म का भी वर्णन मिलता है। माना जाता है कि कुशीनगर के पश्चिम - दक्षिण जहां मॉल्लो का रायगढ़ मौजूद था। वहां जैन धर्म के 24 वे तीर्थ यात्री महावीर स्वामी जो की गौतम बुद्ध के समकालीन थे, जो पवानगर अर्थात् फाजिलनगर में परिनिर्वाण को प्राप्त हुए। इस बौद्ध तथा जैन धर्मो के अलावा यहां हिन्दू धर्मो भी जिक्र मिलता है। कुशीनगर जिले के तुर्क+पट्टी वह स्थान है जहां उत्तर भारत का सूर्य मंदिर स्थित है। यहां भगवान सूर्य की प्रतिमा तब प्राप्त हुई थी जब किसी कारण यहां खुदाई का कार्य चल रहा था।

कुशीनगर जिले का मुख्यालय पडरौना के रूप में विकसित है। इसकी नाम करण के संबंध में यह मान्यता है, कि जब भगवान राम का विवाह जनक पुत्री सीता तय हुआ। तब भगवान राम के सखे संबंधी जनकपुर से इसी रास्ते अयोध्या लौटे थे। भगवान राम के पैरो से रमित धरती पहले पदरामा उसके बाद पडरौना के नाम से जानी गई। पडरौना से 10 किलोमीटर पूर्व से बह रह बाशी नदी मिलती है, जिसे भगवान राम पर कर अयोध्या लौटे थे। इस नदी को रामघाट के नाम से भी जाना जाता है। यहां हर साल मेले का आयोजन किया जाता है। जहां उत्तर - प्रदेश और बिहार के लाखो श्रद्धालु इस मेले में भाग लेते है। 

(अगर आपको यह पोस्ट अच्छी लगी हो तो दूसरों को सारे जरूर करें, अगर इस पोस्ट में कुछ त्रुटी हो तो कमेंट में जरूर अपनी प्रतिक्रिया दे हम कोशिश करेंगे इस और अच्छे से आपके सामने प्रस्तुत करें)

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ